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सीएमओ कार्यालय की ‘सरपरस्ती’ में मरीजों की जान से खिलवाड़: रूधौली सीएचसी के गेट पर मौत की दुकान!

कागजों में बंद, हकीकत में बुलंद: बिना पंजीकरण के फल-फूल रहा 'शान्ति पैथोलॉजी' का अवैध कारोबार।

अजीत मिश्रा (खोजी)

🚨सीएमओ कार्यालय की सरपरस्ती में फल-फूल रहा अवैध पैथोलॉजी का काला कारोबार🚨

⭐स्वास्थ्य विभाग ने फेर ली नजरें: नौसिखिए लड़कों के हाथ में एक्सरे मशीन, भगवान भरोसे मरीजों की धड़कनें।

⭐डिग्री का पता नहीं, ‘चाचा’ का रसूख काफी है: रूधौली में अवैध डायग्नोस्टिक सेंटर का बेखौफ संचालन।

⭐ क्या सीएमओ कार्यालय को मिलता है ‘कमीशन’? सीएचसी के ठीक सामने अवैध सेंटरों की भरमार!

⭐एक्सपोज: “कोर्स कहां से किया, चाचा जानते हैं”— अवैध पैथोलॉजी के स्टॉफ का शर्मनाक कुबूलनामा।

⭐बस्ती स्वास्थ्य विभाग का काला सच: बिना डॉक्टर, बिना टेक्नीशियन… बस चल रही है लूट की मशीन!

⭐सावधान! कहीं आप भी तो नहीं करा रहे इन ‘फर्जी’ सेंटरों पर जांच? रूधौली में बड़े घोटाले का पर्दाफाश।

बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।

बस्ती। सरकारी सिस्टम की नाक के नीचे जब भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो जाएं, तो आम आदमी की जान की कीमत कौड़ियों के भाव हो जाती है। जनपद के स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिल रहा है। जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय की ‘कथित’ अनभिज्ञता या यूं कहें कि मौन स्वीकृति के संरक्षण में अवैध डिजिटल एक्सरे और ईसीजी सेंटरों का जाल कुकुरमुत्तों की तरह फैल गया है। ताज़ा मामला रूधौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के ठीक सामने संचालित हो रही ‘शान्ति पैथोलॉजी’ का है, जो विभागीय दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।

💫सीएचसी के गेट पर ‘खेल’, जिम्मेदार बने अनजान

हैरानी की बात यह है कि जिस रूधौली सीएचसी पर आए दिन जिले के आला अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों का जमावड़ा लगा रहता है, उसी के प्रवेश द्वार के ठीक सामने ‘शान्ती पैथोलॉजी’ का भारी-भरकम बोर्ड सीना ताने खड़ा है। बिना किसी वैध पंजीकरण के संचालित इस सेंटर के भीतर जो खेल चल रहा है, वह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि मरीजों की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ है।

💫नौसिखियों के हाथ में एक्सरे मशीन: ‘चाचा’ का रसूख और फर्जीवाड़ा

प्रेस टीम की पड़ताल में जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला है। सेंटर पर डिजिटल एक्सरे और ईसीजी जैसी संवेदनशील जांचें कोई प्रशिक्षित टेक्नीशियन नहीं, बल्कि कम उम्र के लड़के कर रहे हैं। मौके पर मौजूद आशुतोष नामक युवक से जब उसकी योग्यता पूछी गई, तो उसने बेबाकी से कुबूल किया कि संचालक राजेश यादव उसके चाचा हैं और उन्होंने ही उसे यह काम सिखाया है।

“डिग्री कहां की है और कोर्स कौन सा है, यह तो चाचा ही जानें।” — आशुतोष (सेंटर पर कार्यरत युवक)

स्पष्ट है कि यहाँ न तो कोई रेडियोलॉजिस्ट है और न ही वैध लैब टेक्नीशियन। बिना किसी प्रमाणित रिपोर्ट के मरीजों को जांच थमा दी जाती है, जिसके आधार पर होने वाला इलाज मरीज के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।

💫क्या वाकई सीएमओ कार्यालय को खबर नहीं?

सवाल यह उठता है कि क्या जिले के स्वास्थ्य विभाग के मुखिया इतने लाचार हैं कि उन्हें अपनी नाक के नीचे चल रहे इस अवैध कारोबार की भनक तक नहीं? या फिर ‘सुविधा शुल्क’ के फेर में आंखों पर भ्रष्टाचार का चश्मा चढ़ा लिया गया है?

👉पंजीकरण का अभाव: बिना रजिस्ट्रेशन के इतने बड़े बोर्ड लगाकर सेंटर चलाना विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

👉प्रशिक्षण का शून्य स्तर: अनपढ़ या कम उम्र के लड़कों से एक्सरे कराना रेडिएशन सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन है।

👉निरीह मरीजों का शोषण: गरीब और अनजान मरीजों को गुमराह कर उनकी जेबें ढीली की जा रही हैं।

🙈”नहीं बचेंगे दोषी” — आश्वासन या रस्म अदायगी?

जब इस गंभीर प्रकरण पर सीएमओ डॉ. राजीव निगम से तीखे सवाल किए गए, तो उन्होंने हमेशा की तरह रटा-रटाया जवाब दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि मामला गंभीर है और नोडल अधिकारी डॉ. एस.बी. सिंह को जांच कर कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।

अब देखना यह होगा कि क्या यह जांच केवल फाइलों तक सीमित रहेगी या फिर इन ‘मौत की दुकानों’ पर ताला लगेगा? बस्ती की जनता यह पूछ रही है कि जब तक कोई बड़ी अनहोनी नहीं हो जाती, तब तक स्वास्थ्य महकमा गहरी नींद से क्यों नहीं जागता?

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